तेंदूपत्ता इकट्ठा करने वालों को जूते-चप्पल के साथ ‘कैंसर’ बांट रही मध्यप्रदेश सरकार

भोपाल:

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मध्यप्रदेश में चुनाव से पहले आदिवासी वोटरों को जयस जैसे संगठनों के प्रभाव से बचाने सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को सरकारी जूते-चप्पल पहनाए, साड़ियां बांटीं लेकिन इसी सौगात से सरकार के सामने कई सवालों खड़े हो गए हैं. केन्द्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट जिसकी कॉपी एनडीटीवी पास है, कहती है कि इन जूतों में खतरनाक रसायन एजेडओ मिला है. इससे कैंसर होने की आशंका है.

      

बैतूल जिले के झाड़कुंड में रहने वाले जिला परते तेंदुपत्ता बीनते हैं. सरकार ने इन्हें ये जूते दिए लेकिन बस इसे देखते हैं, पहनते नहीं कहते हैं कैंसर का डर लगता है. वे कहते हैं कि तेंदुपत्ता तोड़ते हैं, सर … सरकार ने जूता दिया था लेकिन पहनने की इच्छा नहीं होती इसमें कैंसर का असर होता है, गांव वाले भी बोलते हैं. झाड़कुंड के 19 हितग्राहियों को जूते चप्पल मिले हैं. बिंदियाबाई भी दूसरी चप्पल पहन लेती हैं, सरकारी नहीं पहनतीं. उन्होंने कहा- फॉरेस्ट वाले ने चप्पल दिया एक महीना हो गया, गांव में बात चल रही है, कैंसर हो रहा है इसलिए नहीं पहनते.

    

बैतूल में 18 जून को लाखों रुपये खर्च कर सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते पहनाए, ऐसे कार्यक्रम राज्य के कई ज़िलों में हुए जिसकी शुरुआत 20 मई को शिवपुरी के पोहरी से हुई थी. ऐसे हर कार्यक्रम में तेंदुपत्ता बीनने वालों को जूते-चप्पल, पानी की बॉटल और साड़ी बांटी गईं. अब तक 8 लाख 13000 जूते बांट दिए गए. लेकिन 27 जून यानी महीने भर बाद चेन्नई के केन्द्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट आई तो उसने जिला और बिंदिया जैसे लोगों को डरा दिया. ये रिपोर्ट बताती है कि इन जूतों में एजेडओ पाया गया है.

 

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जूते के अंदर काले रंग के इनर सोल में यह रसायन मिला है. पांव में कांटा लगने, कटने या छाले पड़ने पर यह शरीर में चला जाता है. पसीना आने पर भी यह रसायन त्वचा में जा सकता है. नतीजन त्वचा का कैंसर होने की आशंका ज्यादा रहती है. केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 23 जून 1997 को एजेडओ डाई के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया था. इसका इस्तेमाल कपड़े, जूते-चप्पल और फैशन एसेसरीज को रंगने में होता है.

       

पर्यावरणविद डॉ सुभाष सी पांडेय ने कहा एजेडाई एरोमेटिक अमीन है जिसका इस्तेमाल चमड़े और कॉटन उद्योग में होता है, इससे सीधे तौर पर स्किन कैंसर हो सकता है. ये प्रजनन की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. ये इतने खतरनाक हैं यदि सरकार चाहे वापस ले ले. चप्पल फेंक दें तो वहां भी पानी, जमीन को प्रदूषित कर देगा वो कैंसर कारक हो जाएगा.

 

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इसके ख़तरे के बारे में समझने के बाद भी सरकार खुद को सर्टिफिकेट देने पर तुली है. वनमंत्री गौरीशंकर शेजवार का कहना है दो संस्थानों को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी. निविदा में दो शर्तें थी पोस्ट डिलीवरी, प्री डिलीवरी जांच हो गई… इस बात की पुष्टि कर रहे हैं. कहीं खराब जूतों का वितरण नहीं हुआ है.. जो बंटे हैं उनमें कोई खतरा नहीं. हालांकि मंत्रीजी ये नहीं बता पा रही हैं कि 20 मई को जो जूते बंटे, रिपोर्ट 28 जून को आई फिर महीने भर से जो हितग्राही जूते पहन रहे हैं उनका क्या.

बहरहाल कुछ सामाजिक संगठन और विपक्ष इस मुद्दे को उठाने लगा है. जय आदिवासी युवा संगठन के लोग आदिवासियों के घरों में जाकर उन्हें नए जूते दे रहे हैं. जयस के कार्यकर्ता गयासिंह परते कहते हैं हम एक मुहिम चला रहे हैं. शिवराज सरकार ने जो जूते बांटे हैं वे वापस ले रहे हैं. हमारे पास से नए जूते चप्पल हितग्राहियों को दे रहे हैं ताकि स्वास्थ्य ठीक रहे.

    

वहीं कांग्रेस इन जूते चप्पल के साथ पुतला जला रही है, पोस्टर बैनर से सरकार का विरोध कर रही है. कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने कहा इसकी उच्चस्तरीय जांच हो. ऐसी चप्पल को पहले मुख्यमंत्री खुद पहनें फिर आम जनता को, महिलाओं को दें. इसमें लापरवाही भी है, भ्रष्ट्राचार भी है.

    

आदिवासी वोट बैंक मध्यप्रदेश में बीजेपी की ताकत रहा है. इसे और पुख्ता करने तेंदूपत्ता संग्राहकों में जूता चप्पल बांटे गए ठीक चुनावों से पहले, क्योंकि राज्य में अनुसूचित जनजाति की आबादी 20.8 फीसद है. राज्य में 47 अनुसूचित जनजाति बहुल सीटों में 32 पर बीजेपी का कब्जा है. लेकिन इस बार उसे जयस जैसे संगठनों से कड़ी टक्कर मिल रही है, जो कुल 80 आदिवासी बहुल सीटों पर उम्मीदवार उतारने का मन बना रहे हैं.

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